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रावण शनि एवं हनुमान      
जगत पासिध कथा है की जब रावण की पत्नी मंदोदरी गर्भवती थी उस समय सभी ग्रह रावण की कैद में काराग्रह में उल्टे लटके हुए थे | रावण को मंदोदरी से अजर , अमर , परमतेजस्वी परम्बल्शाली पुत्र की कामना थी |जब संतानोपत्ति का समय नजदीक आया तो रावण ने सभी ग्रहो को अपने-अपने उच् स्थान पर जाने को कहा रावण के आदेश अनुसार सभी ग्रह अपने-अपने उच् स्थान पर चले गए |परन्तु सभी ग्रह चिंतित थे की यदि रावण का पुत्र उनसे भी अधिक बलशाली होगा तो हमारा क्या हाल होगा | उन्होंने शनि देव से कहा ऐसा कुछ करो की हम रावन की कैद से मुक्त हो जाएँ तभी लाभ (एकादश) भाव में बैठे शनिदेव ने चुपके से अपनी टांग (बारहवे भाव अकाल मृतु में दाल दी ) उस समय रावण पुत्र होने का उत्सव मना रहा था |
रावण शनि एवं हनुमान
महर्षि पिप्लाद और शनिदेव
सम्राट हरीशचंद्र एवं शनि
महाराजा नल-दमयंती एवं शनि
लक्ष्मी और शनि संवाद
पांडव और शनि देव
वैदिक मंत्र
बिज मंत्र
भविष्य पुराण की कथाओ
 

कुछ समय बाद रावण ने मेघनाथ की शोद्शार्व्गी कुंडली बनाई | तब रावण ने देखह की शनि बारहवे भाग में चला गया | शनि देव की यह हरकत देखकर रावण को अत्यंत क्रोध आया और ब्र्हाम्पाश की सहायता से शनि को बांधकर अपने कारावास में उल्टा टांग दिया |उस समय रावण सहनी की साडेसाती में आ चुके थे उसका शनिदेव ने ब्र्हाम्पाश का अनादर ना करते हुए उसके कारावास में उल्टे लटके रहे उन्होंने अपने अराध्य शिव की स्तुति की तब शिवजी ने कही हनुमान आएगा , रावण का संहार करेगा |तुम्हे इस बंधन से मुक्त कराएगा |

जब हनु मान लंका भस्म करने लगे तो लंका भस्म नहीं हो रही थी क्युओक्नी वह सोने की थी | हनुमान जी जितना भस्म करने की कोशिश करते उतना ही आग का ताप हनुमान जी को तपता था | अकस्मात उनकी नज़र उल्टे लटके शनि पर पड़ी | हनुमान जी ने तुंरत शनि देव को रावण को कैद से मुक्त किया | सीधे खड़े होते ही जैसे शनिदेव ने अपनी रोषपूर्ण द्रष्टि लंका पर डाली वैसे ही लंका राख होती चली गयी और रावण का कुटुंब परिवार सहित सर्वनाश हुआ | तभी शनि शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया की मैं आपके भक्तों को कभी कष्ट नहीं दूंगा | अत: शनि की पणोति के समय जो लोग शनि देव के साथ-साथ हनुमान जी की पूजाक रेंगे उन्हें ज्यादा व्यतीत करेंगे |

 
 
 
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