कुछ समय बाद रावण ने मेघनाथ की शोद्शार्व्गी कुंडली बनाई | तब रावण ने देखह की शनि बारहवे भाग में चला गया | शनि देव की यह हरकत देखकर रावण को अत्यंत क्रोध आया और ब्र्हाम्पाश की सहायता से शनि को बांधकर अपने कारावास में उल्टा टांग दिया |उस समय रावण सहनी की साडेसाती में आ चुके थे उसका शनिदेव ने ब्र्हाम्पाश का अनादर ना करते हुए उसके कारावास में उल्टे लटके रहे उन्होंने अपने अराध्य शिव की स्तुति की तब शिवजी ने कही हनुमान आएगा , रावण का संहार करेगा |तुम्हे इस बंधन से मुक्त कराएगा |
जब हनु मान लंका भस्म करने लगे तो लंका भस्म नहीं हो रही थी क्युओक्नी वह सोने की थी | हनुमान जी जितना भस्म करने की कोशिश करते उतना ही आग का ताप हनुमान जी को तपता था | अकस्मात उनकी नज़र उल्टे लटके शनि पर पड़ी | हनुमान जी ने तुंरत शनि देव को रावण को कैद से मुक्त किया | सीधे खड़े होते ही जैसे शनिदेव ने अपनी रोषपूर्ण द्रष्टि लंका पर डाली वैसे ही लंका राख होती चली गयी और रावण का कुटुंब परिवार सहित सर्वनाश हुआ | तभी शनि शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया की मैं आपके भक्तों को कभी कष्ट नहीं दूंगा | अत: शनि की पणोति के समय जो लोग शनि देव के साथ-साथ हनुमान जी की पूजाक रेंगे उन्हें ज्यादा व्यतीत करेंगे | |